Saturday, 15 February 2020

चन्दा

भारतीय दर्शन में कार्य-कारण भाव की  विस्तृत जानकारी  मिलती है।कार्य है तो कारण भी होगा। चाँदनी है तो चाँद भी होगा। प्रत्येक कार्य का कारण अवश्य होता है। यथार्थ व कल्पना के मिश्रण से उत्पन्न यही भावाभिव्यक्ति छोटी-सी रचना में सन्निहित है------------

            चन्दा

दिखा दो मुझको गगन में चन्दा,
न जाने ओझल कहाँ हुआ है?
सितारे भी  झिलमिला रहे हैं,
घटा से अम्बर घिरा कहाँ है?
चलो-चलें,देखें,ढूँढें चन्दा,
कहीं तो वो जगमगा रहा है?
गिरि,कन्दरा,वन-उपवन या मन में,
जहाँ भी वो खिलखिला रहा है।
सुनो प्रिये!चाँद मन में उतरा,
वहीं ये हलचल मचा रहा है।
गगन से जल में,धरा से मन में,
उतर वहाँ, छिप, चमक रहा है।
षोडश कलाएँ दिखा दीं दिल में,
भावों का सागर उमड़ रहा है।
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डाॅ0(श्रीमती)गीता मिश्रा'गीत'

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