Saturday, 6 June 2020

हाला,प्याला, मधुशाला

प्रणाम काव्य-धारा---
दिए गये शब्द---हाला,प्याला,मधुशाला

प्रिय!तुम मुझको आज पिला दो,
प्रेम,प्यार-पूरित प्याला।
बाँह छुड़ाकर क्यों जाते हो?
आज न जाओ मधुशाला।।
हाला पीकर नहीं मिटेगी,
अन्तरमन की ये ज्वाला,
मदिर-मदिर मदमस्त हृदय से,
बुला रही है मधुबाला।।
जीवन है अनमोल,घोल देती है विष,मदिरा,हाला।
रोता है परिवार मगर,
तिल-तिल मरता पीने वाला।।
-----------*******------------
डाॅ0श्रीमती गीता मिश्रा 'गीत'
हल्द्वानी (नैनीताल)उत्तराखंड।

No comments:

Post a Comment

  सुहानी-सुबह             कविता 1. रँग में अपने रंग दिया, रवि ने सुबह से ही गगन। देख नभ की अरुणिमा को, चारों दिशाएँ भी मगन।। 2.लालिमा भी प्य...