Saturday, 6 June 2020

मेकल छंद

मेकल छंद----
1.कैसी मधुर बहार है
धवल-नवल रसधार है
देखो!निकली यामिनी
चिर नूतन श्रृंगार है।

2.ये नन्दन, गोपाल है
गल वैजन्तीमाल है
बाजत रुनझुन पैंजनी
सुन्दर, मनहर चाल है।

3.अलि!राग में,'बहार' ले
    'तान,' स्वर-विस्तार'ले
    आज 'तराना' छेड़ दे
    'सरगम'सरस फुहार ले।

4.सैनिक वीर जवान है
    भारत माँ की शान है
    करता सीमा की रक्षा
   कहता देश महान है।👏🏼👏🏼👏🏼

डाॅ0 श्रीमती गीता मिश्रा 'गीत'

सुख-दुख की लहरें

सुख-दुख की लहरें उद्वेलित,
भँवर उठे, सागर भी  तरंगित।
छोटी नाव, गहन है धारा,
नहीं सूझता कोई किनारा।
हे ईश्वर!प्रभु!भगवन्!भोले!
नाव मेरी मँझधार में डोले,
जीवन-नैया पार लगा दे,
सहज किनारा मुझे दिखा दे।।

चित्राधारित कविता

चित्राधारित कविता लेखन संख्या--29

गहरे लाल सिंदूरी रंग ने,
मनमोहक परिदृश्य बनाया।
सजे गुलमौहर डगर किनारे,
बिखरा रंग, कुदरती माया।

ये अद्भुत,नूतन परिवर्तन,
देख-देख मानव भरमाया।
प्रकृति-प्रेमियों के विस्मित-दृग-
उलझ पड़े,मन अति हरषाया।
पंकज, पंक-सलिल में पुष्पित,
सुन्दर, सुरभित और सुगन्धित
हृदय-पटल पर यदि खिल जाए,
सचमुच समाधान मिल जाए।
जीवन-नलिन मुदित यदि हर-पल,
तो कठिनाई, मुश्किल भी हल।
विविध रंग,मन-अंबुज पाए,
खुशियों का शतदल खिल जाए।।

हाला,प्याला, मधुशाला

प्रणाम काव्य-धारा---
दिए गये शब्द---हाला,प्याला,मधुशाला

प्रिय!तुम मुझको आज पिला दो,
प्रेम,प्यार-पूरित प्याला।
बाँह छुड़ाकर क्यों जाते हो?
आज न जाओ मधुशाला।।
हाला पीकर नहीं मिटेगी,
अन्तरमन की ये ज्वाला,
मदिर-मदिर मदमस्त हृदय से,
बुला रही है मधुबाला।।
जीवन है अनमोल,घोल देती है विष,मदिरा,हाला।
रोता है परिवार मगर,
तिल-तिल मरता पीने वाला।।
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डाॅ0श्रीमती गीता मिश्रा 'गीत'
हल्द्वानी (नैनीताल)उत्तराखंड।

शिखरिनी छंद

शिखरिनी छंद---
1.उदित मंद
पीताभ रंग-संग
  बालचंद

2.गाएँगे फाग
संग होरी,धमार
ध्रुपद राग

3.हैं मजबूर
पैदल मजदूर
मंजिल दूर

4.ये छतनार
है पादप रसाल
नमित भार

5.रे नटखट!
बनवारी, छलिया
जा पनघट

6.राग मधुर
गाएँगे मिलकर
सारंगी पर
    ---------*****------          डाॅ0(श्रीमती)गीता मिश्रा 'गीत'
दोहा-लेखन-



1.सत्य-वचन,अमृत-सदृश, झूठ-वचन विष जान।
जिसकी जैसी समझ है,
वैसा करता पान।।
2.श्रेष्ठ कर्म,श्रम जो करें,प्रभु पर कर विश्वास।
बदल जाएँ दुर्भाग्य सब,यदि हो सत्य प्रयास। ।
3.निर्मल मन दर्पण सदृश,ज्यों का त्यों कह देय।
दम्भ,कपट,छल-भरा मन,सारे सुख हर लेय।।
4.परहित,पर-उपकार से,जन्म सफल हो जाय।
ध्यान लगा जो ईश में,भव-सागर तर जाय।।

डाॅ0 श्रीमती गीता मिश्रा 'गीत'
हल्द्वानी, नैनीताल (उत्तराखंड)

सायली छंद

सायली छंद---
1.   प्रकृति
   सबसे महान
  मत करो दोहन
  निष्ठुर परिवर्तन 
      समाधान 

2.     जलन
     झुलसा देता
      तन-मन-धन
         कर लो
          मनन   

3.      शब्द
      नादमय,ब्रह्ममय
उद्वेलित भाव-सहृदय
     समुचित प्रयोग 
          सार्थक

4.     परिवार
       हो संयुक्त
मिले सहारा परस्पर
    अकेला भ्रमित
    किंकर्तव्यविमूढ़

डाॅ0श्रीमती गीता मिश्रा 'गीत'
हल्द्वानी, नैनीताल (उत्तराखंड)

सोरठा

सोरठा
1.वसन,घटा सम नील, सौम्य राधिका, गौर तन।नयन गहन द्वय झील, देखि स्याम बेसुध भये।।

2.सुस्मित चितवन रेख, निरख चम्पा सकुचाई।
गन्धराज को देख,खिल गई रजनीगंधा।।

3.इन्द्रधनुष-रंग-सात,विविध रंग, शंकर-धनुष।
अरिदल को दे मात,चाप श्रीराम धरैं जो।।
4.
पश्चिम दिक् कर लाल,भानु अब अस्त हो रहा।
सिंदूरी रँग डाल,उदित कल पूरब होगा।।
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डाॅ0श्रीमती गीता मिश्रा 'गीत'

  सुहानी-सुबह             कविता 1. रँग में अपने रंग दिया, रवि ने सुबह से ही गगन। देख नभ की अरुणिमा को, चारों दिशाएँ भी मगन।। 2.लालिमा भी प्य...