देश की संसद में नागरिकता संशोधन विधेयक पास होते ही विपक्षी दलों ने जनता को इतना भड़काया व भ्रमित किया कि हमारा प्रजातंत्र सड़कों पर उतर कर सरकारी सम्पत्ति को ही जलाने लगा। हिंसा,दंगे,हत्या व आग की लपटों से देश जलने लगा।ऐसे वातावरण में आह!से निकली कुछ पंक्तियाँ--------
ये कैसा गणतंत्र?
ये कैसा गणतंत्र हमारा, ये कैसा गणतंत्र?
तोड़-फोड़ कहीं खून-खराबा,
तार-तार इज्जत,मर्यादा।
आगजनी,दंगे-फ़साद में
लिप्त रहे जनतंत्र।।
ये कैसा गणतंत्र हमारा,ये कैसा गणतंत्र?
फाड़ दिया माँ का ही आँचल
जला दिए श्रृंगार,
मातृभूमि पर हमला करना,
अपनों का षडयंत्र।।
ये कैसा गणतंत्र हमारा,ये कैसा गणतंत्र?
अपने ही अपनों को मारें
समझ नहीं, मतिमंद हैं सारे।
ज़हर घोल कानों में इनके
फूँक दिया विषमंत्र।।
ये कैसा गणतंत्र हमारा, ये कैसा गणतंत्र ?
विस्फोटों से दिल दहल रहा,
सीने छलनी हैं बेशुमार।
अपने ही करते जब प्रहार,
होता है दूषित लोकतंत्र।।
ये कैसा गणतंत्र हमारा ये कैसा गणतंत्र ?
मिला न अवसर राजतिलक का,
मिला न मौका गद्दी का।
ऐसे नेता भ्रष्ट चलाते,
दाम,दण्ड के यन्त्र।।
ये कैसा गणतंत्र हमारा, ये कैसा गणतंत्र ?
चक्रव्यूह,शतरंज बिछाकर,
जनता को भरमाते।
फिर कूटनीति से बुरा फँसाते
नेताओं के तन्त्र।।
ये कैसा गणतंत्र हमारा ये कैसा गणतंत्र ?
अज्ञानी,भोली,मूर्ख प्रजा,
आपस में ही भिड़ जाती है,
लोभी,भोगी नेताओं के
जपती रहती है मंत्र।।
ये कैसा गणतंत्र हमारा,ये कैसा गणतंत्र ?
------------×××××-----------
डाॅ0 गीता मिश्रा 'गीत'
ये कैसा गणतंत्र?
ये कैसा गणतंत्र हमारा, ये कैसा गणतंत्र?
तोड़-फोड़ कहीं खून-खराबा,
तार-तार इज्जत,मर्यादा।
आगजनी,दंगे-फ़साद में
लिप्त रहे जनतंत्र।।
ये कैसा गणतंत्र हमारा,ये कैसा गणतंत्र?
फाड़ दिया माँ का ही आँचल
जला दिए श्रृंगार,
मातृभूमि पर हमला करना,
अपनों का षडयंत्र।।
ये कैसा गणतंत्र हमारा,ये कैसा गणतंत्र?
अपने ही अपनों को मारें
समझ नहीं, मतिमंद हैं सारे।
ज़हर घोल कानों में इनके
फूँक दिया विषमंत्र।।
ये कैसा गणतंत्र हमारा, ये कैसा गणतंत्र ?
विस्फोटों से दिल दहल रहा,
सीने छलनी हैं बेशुमार।
अपने ही करते जब प्रहार,
होता है दूषित लोकतंत्र।।
ये कैसा गणतंत्र हमारा ये कैसा गणतंत्र ?
मिला न अवसर राजतिलक का,
मिला न मौका गद्दी का।
ऐसे नेता भ्रष्ट चलाते,
दाम,दण्ड के यन्त्र।।
ये कैसा गणतंत्र हमारा, ये कैसा गणतंत्र ?
चक्रव्यूह,शतरंज बिछाकर,
जनता को भरमाते।
फिर कूटनीति से बुरा फँसाते
नेताओं के तन्त्र।।
ये कैसा गणतंत्र हमारा ये कैसा गणतंत्र ?
अज्ञानी,भोली,मूर्ख प्रजा,
आपस में ही भिड़ जाती है,
लोभी,भोगी नेताओं के
जपती रहती है मंत्र।।
ये कैसा गणतंत्र हमारा,ये कैसा गणतंत्र ?
------------×××××-----------
डाॅ0 गीता मिश्रा 'गीत'
