हंस दोहा -14 गुरु20 लघु
नैतिकता पल्लवित हो,लिए पुरातन कर्म,
सदाचार पुष्पित करे,सत्य सनातन धर्म।।
- डॉ० गीता मिश्रा 'गीत'
सुहानी-सुबह कविता 1. रँग में अपने रंग दिया, रवि ने सुबह से ही गगन। देख नभ की अरुणिमा को, चारों दिशाएँ भी मगन।। 2.लालिमा भी प्य...
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