गीता छंद---मात्रा भार 14 12=26
अधरोष्ठ द्वय सरसिज सदृश, कोमल चटख रक्ताभ।
कटि करधनी झिलमिलाती,
रुनझुन वलय श्वेताभ।
स्याम-तन पर पीत अम्बर ,
ज्यों नील सर पीताभ।
कमनीय अद्भुत् कृष्ण छवि,
लोचन जलज नीलाभ।।
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डाॅ0 गीता मिश्रा 'गीत'
सुहानी-सुबह कविता 1. रँग में अपने रंग दिया, रवि ने सुबह से ही गगन। देख नभ की अरुणिमा को, चारों दिशाएँ भी मगन।। 2.लालिमा भी प्य...
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