सुख-दुख की लहरें उद्वेलित,
भँवर उठे, सागर भी तरंगित।
छोटी नाव, गहन है धारा,
नहीं सूझता कोई किनारा।
हे ईश्वर!प्रभु!भगवन्!भोले!
नाव मेरी मँझधार में डोले,
जीवन-नैया पार लगा दे,
सहज किनारा मुझे दिखा दे।।
भँवर उठे, सागर भी तरंगित।
छोटी नाव, गहन है धारा,
नहीं सूझता कोई किनारा।
हे ईश्वर!प्रभु!भगवन्!भोले!
नाव मेरी मँझधार में डोले,
जीवन-नैया पार लगा दे,
सहज किनारा मुझे दिखा दे।।
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