Saturday, 6 June 2020

सुख-दुख की लहरें

सुख-दुख की लहरें उद्वेलित,
भँवर उठे, सागर भी  तरंगित।
छोटी नाव, गहन है धारा,
नहीं सूझता कोई किनारा।
हे ईश्वर!प्रभु!भगवन्!भोले!
नाव मेरी मँझधार में डोले,
जीवन-नैया पार लगा दे,
सहज किनारा मुझे दिखा दे।।

No comments:

Post a Comment

  सुहानी-सुबह             कविता 1. रँग में अपने रंग दिया, रवि ने सुबह से ही गगन। देख नभ की अरुणिमा को, चारों दिशाएँ भी मगन।। 2.लालिमा भी प्य...