Saturday, 6 June 2020

सोरठा

सोरठा
1.वसन,घटा सम नील, सौम्य राधिका, गौर तन।नयन गहन द्वय झील, देखि स्याम बेसुध भये।।

2.सुस्मित चितवन रेख, निरख चम्पा सकुचाई।
गन्धराज को देख,खिल गई रजनीगंधा।।

3.इन्द्रधनुष-रंग-सात,विविध रंग, शंकर-धनुष।
अरिदल को दे मात,चाप श्रीराम धरैं जो।।
4.
पश्चिम दिक् कर लाल,भानु अब अस्त हो रहा।
सिंदूरी रँग डाल,उदित कल पूरब होगा।।
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डाॅ0श्रीमती गीता मिश्रा 'गीत'

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