सन् 2019 में राखी व राष्ट्रीय पर्व पन्द्रह अगस्त के, साथ-साथ आगमन पर,
सैनिकों की अंतरंग इच्छा को कविता के रूप में कुछ इस तरह लिखने का प्रयास किया।आपकी प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा में-----
सैनिकों की अंतरंग इच्छा को कविता के रूप में कुछ इस तरह लिखने का प्रयास किया।आपकी प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा में-----
तिरंगे वाली राखी
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हम रक्षक हैं सीमाओं के,
प्रहरी हिन्दुस्तान के ।
बहिनों!राखी हमें भेजना,
हम बाँधेंगे शान से।।
यूँ तो दिव्य-दुलार तुम्हारा,
हमें सदा मिलता रहता।
छोटी-बड़ी सभी बहिनों का,
प्यार कलाई पर सजता।।
हमें सदा मिलता रहता।
छोटी-बड़ी सभी बहिनों का,
प्यार कलाई पर सजता।।
पर अबकी बार तिरंगे वाली,
राखी सैनिक पहनेंगे।
भाई-बहिन के स्नेह में डूबा
देश-प्रेम दर्शाएँगे ।।
राखी सैनिक पहनेंगे।
भाई-बहिन के स्नेह में डूबा
देश-प्रेम दर्शाएँगे ।।
आजादी के पुण्य-पर्व पर,
पहन इसे गर्वित होंगे।
मिला कदम समवेत स्वरों में
आगे बढ़ते जाएँगे।।
पहन इसे गर्वित होंगे।
मिला कदम समवेत स्वरों में
आगे बढ़ते जाएँगे।।
सौभाग्य जगा है भारत का,
दुर्भाग्य भगा है भारत का।
खंडित कश्मीरी हिस्से को,
भारत का अंग बनाएँगे ।।
दुर्भाग्य भगा है भारत का।
खंडित कश्मीरी हिस्से को,
भारत का अंग बनाएँगे ।।
ऐसी राखी भेजो बहिनों!
बस हिन्द तिरंगा ही दमके।
एक तिरंगा हाथों पर तो
एक कलाई पर चमके।।
बस हिन्द तिरंगा ही दमके।
एक तिरंगा हाथों पर तो
एक कलाई पर चमके।।
अमर रहे 'पन्द्रह अगस्त',
नभ-भेदी बिगुल बजाएँगे।
राखी वाले हाथों से ही,
सुनो! तिरंगा फहराएँगे।।
नभ-भेदी बिगुल बजाएँगे।
राखी वाले हाथों से ही,
सुनो! तिरंगा फहराएँगे।।
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---- डाॅ0 गीता मिश्रा 'गीत'
रचना-तिथि----8.8.2019
रचना-तिथि----8.8.2019
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