Thursday, 9 January 2020

हिन्द-सेना की चेतावनी

कश्मीरी भटके युवकों को
हिन्द-सेना की चेतावनी---

कश्मीरी छद्मी युवको सुनलो!
छल-बल करना बन्द करो,
भारत के अँचल में पलकर,
अब, अरि-बल बनना बन्द करो।।

कर सचेत,अनगिनत बार,
तुमको समझाया बार-बार।
हमने मानवता के नाते,
सुविधाएँ दे दीं बेशुमार।।

तुम डंक मार,ज़हरीले निकले,
घर में फ़न फैलाए निकले
आॅस्तीन का साँप निकले,
विषधर! खूब विषैले निकले।।
खूँखार बने,गद्दार बने,
रुपयों के आगे भटक गए।
हाथों में प्रस्तर उठा-उठा,
निज सेना पर ही पटक गए।।

धिक्कार है उस नादानी को!
जो अपनों पर ही वार करे।
धिक्कार है भ्रमित जवानी को!
जो माँ का ही संहार करे।।

हम सेनानी,हिन्दुस्तानी,
रणवबीर, बाँकुरे,बलिदानी।
भारत-माँ की रक्षा में हरदम,
हँस -हँसकर देंगे कुर्बानी ।।
ज़िन्दा हैं जब तक हम प्रहरी,
अस्त्रों से दागेंगे गोली।
कश्मीर, हिन्द की है धरती
मारेंगे गीदड़ की टोली।।

शत्रू की जंगी चालों को
घातों को,सभी कुचालों को,
हम तहस-नहस कर डालेंगे,
हम ध्वस्त-पस्त कर डालेंगे।।

हुँकारेंगे , ललकारेंगे,
चुन-चुनकर अरि को मारेंगे।
हम वीर-धीर सेनानी हैं,
डंके की चोट सुनाएँगे।।

बहुत कर लिया रक्तपात,
अब भस्म तुम्हें हम कर देंगे।
विजयी भारत में घूम-घूम,
नारा 'जयहिन्द' लगाएँगे।।

इस स्वर्ग -समान पुनीत धरा पर,
हिन्द-तिरंगा ही फहरेगा।
नभ तक झंकृत होगा 'जयहिन्द,
'बन्देमातरम्' गूँजेगा।।
बन्देमातरम्' गूँजेगा।।
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रचना-तिथि--22-2-2019
डाॅ0 (श्रीमती) गीता मिश्रा

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