Thursday, 9 January 2020

मंगल-गीत

आगत गणतन्त्र-समारोह 2019 के शुभ-अवसर पर विश्व -कल्याण की कामना वाली पूर्व-रचित रचना प्रेषित कर रही हूँ------

मंगल-गीत

मंगल सभी का हो यहाँ
सबके मधुर सम्बन्ध हों,
मैं दे रही दिल से दुआएँ
सब सुखी सम्पन्न हौं।

वर्षभर शुभकामनाओं
के दीये जलते रहें,
हर द्वार पर खुशियों के
बन्दनवार लहराते रहें।
सत्यता की धूप देकर
मन-भवन पावन करें,
दुर्भावनाओं का हवन
सद्भावों का अर्चन करें।

सम्मान, उन्नत ज्ञान का
चन्दन लगा हो भाल में,
संकल्प का हो आचमन
कर्त्तव्य पूजन-काल में।

प्रेम-धुन से शंख-सा
जयघोष गुंजित हो सके,
सुख-शांति के तोरण-कलश
चारों दिशाओं में सजें।

पालने में प्यार से-
बचपन सदा पलता रहे,
यौवन ,युवा का खिल उठे,
सौन्दर्य बिखराता रहे।
जो ज़िन्दगी के अनुभवों
का सार लेकर जी रहे,
उन पूर्वजों के भव्य,
अनुपम ज्ञान की छाया रहे।

अन्त में----
कोई न भूखा हो ज़हाँ में
अन्न,जल,धन पा सकें,
निर्धन भी अब हर हाल में
खुशहाल जीवन जी सकें ।
------ डाॅ0 गीता मिश्रा

No comments:

Post a Comment

  सुहानी-सुबह             कविता 1. रँग में अपने रंग दिया, रवि ने सुबह से ही गगन। देख नभ की अरुणिमा को, चारों दिशाएँ भी मगन।। 2.लालिमा भी प्य...