26जनवरी 2019, गणतंत्र -दिवस के राष्ट्रीय पावन-पर्व पर भारतमाता के अनुपम सौन्दर्य
को याद करते हुए कुछ पंक्तियाँ लिखीं। हम सब भारतीयों की विचारधारा, भारत माँ के प्रति
सर्वस्व-समर्पण की सदैव बनी रहे। इस आशा के साथ प्रेषित कर रही हूँ रचना--
को याद करते हुए कुछ पंक्तियाँ लिखीं। हम सब भारतीयों की विचारधारा, भारत माँ के प्रति
सर्वस्व-समर्पण की सदैव बनी रहे। इस आशा के साथ प्रेषित कर रही हूँ रचना--
'भारतमाता'
भारतमाता
मैं,विश्वपटल पर सबसे पावन,
दिव्य भूमि जन-जन-मन-भावन,
निर्झर,नदियों के संगम में,
मधुर-मधुर-मृदु गीत सुनाती।
मैं भारतमाता कहलाती।
मैं,विश्वपटल पर सबसे पावन,
दिव्य भूमि जन-जन-मन-भावन,
निर्झर,नदियों के संगम में,
मधुर-मधुर-मृदु गीत सुनाती।
मैं भारतमाता कहलाती।
है रूप नवल,श्रृंगार नवल,
निज बच्चों पर अनुराग धवल,
मैं नीर-नेह-नयनों में ले,
सिंचित कण-कण को करवाती।
मैं भारतमाता कहलाती।
विमल,श्वेत हिमवान है मुझमें,
गहन-सघन वन-प्रांत है मुझमें,
उमड़ रहा रत्नाकर देखो,
मचल-मचल नदियाँ लहरातीं।
मैं भारतमाता कहलाती।
मैं, सरल-सहज भावों वाली,
माधुर्य, मनोहर गुणवाली,
रस,छंद,कला से सजी-धजी,
कुदरत की रचना मदमाती।
मैं भारतमाता कहलाती।
फल-फूलों से लदे हैं टीले,
रंग-बिरंगे बड़े रसीले,
मेरे खेतों की हरियाली,
अनुपम सुन्दरता बिखराती।
मैं भारतमाता कहलाती।
मैं भोले - से बचपन में हूँ,
बाग-बगीचे, उपवन में हूँ,
मैं,नील,हरित,पीताम्बर वाली
थिरक-थिरक दिल धड़काती।
मैं भारतमाता कहलाती।
रंगीन तितलियाँ मँडरातीं,
सुरभित - सुमनों पर इतरातीं,
जब विहग-वृन्द कलरव करते,
तब मन्द-मन्द मैं मुस्काती।
मैं भारतमाता कहलाती।।
रचना-तिथि----26.1.2019
डाॅ0श्रीमती गीता मिश्रा।
No comments:
Post a Comment