Thursday, 9 January 2020
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सुहानी-सुबह कविता 1. रँग में अपने रंग दिया, रवि ने सुबह से ही गगन। देख नभ की अरुणिमा को, चारों दिशाएँ भी मगन।। 2.लालिमा भी प्य...
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शिखरिनी छंद--- 1.उदित मंद पीताभ रंग-संग बालचंद 2.गाएँगे फाग संग होरी,धमार ध्रुपद राग 3.हैं मजबूर पैदल मजदूर मंजिल दूर 4.ये छ...
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प्रणाम काव्य-धारा--- दिए गये शब्द---हाला,प्याला,मधुशाला प्रिय!तुम मुझको आज पिला दो, प्रेम,प्यार-पूरित प्याला। बाँह छुड़ाकर क्यों जाते ...
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चित्राधारित कविता लेखन संख्या--29 गहरे लाल सिंदूरी रंग ने, मनमोहक परिदृश्य बनाया। सजे गुलमौहर डगर किनारे, बिखरा रंग, कुदरती माया। ये...

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