सावन-माह की प्रारम्भिक बरसात देख हृदय-घट में भाव कुछ इस तरह उमड़ पड़े----
सावन-संगीत
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सुनो प्रिय! सावन का संगीत।
मधुर-मन-भावन वाला गीत ।।
'मेघ-राग' सावन ने गाया,
बादल उमड़ पड़े,
मचल-मचल फिर घुमड़, बरस कर,
धरती से मिल गये।
निहारो मिलन, मेरे मनमीत!
प्रकृति की दिव्य,निराली प्रीत।।
बादल उमड़ पड़े,
मचल-मचल फिर घुमड़, बरस कर,
धरती से मिल गये।
निहारो मिलन, मेरे मनमीत!
प्रकृति की दिव्य,निराली प्रीत।।
सुनो प्रिय! सावन का संगीत।
मधुर-मन-भावन वाला गीत।।
मधुर-मन-भावन वाला गीत।।
'आरोह-अवरोह','पकड़' सुनाकर
करे राग-विस्तार,
गति बिलम्ब -'आलाप'-आलापे,
तानों की झनकार।।
नाथ!ये आत्मिक-सुख-संगीत।
पारलौकिक,आध्यात्मिक गीत।।
करे राग-विस्तार,
गति बिलम्ब -'आलाप'-आलापे,
तानों की झनकार।।
नाथ!ये आत्मिक-सुख-संगीत।
पारलौकिक,आध्यात्मिक गीत।।
सुनो प्रिय! सावन का संगीत।।
मधुर-मन-भावन वाला गीत।।
मधुर-मन-भावन वाला गीत।।
'होरी','ध्रुपद','धमार' सुनाता,
छेड़े कभी 'तराने'।
कभी 'ठुमरियाँ','थाट','मुरकियाँ'
लेता उलझी 'तानें'।।
मेरे अन्तर्मन! अनहद मीत!
'नाद'-मय-समय न जाए बीत।।
छेड़े कभी 'तराने'।
कभी 'ठुमरियाँ','थाट','मुरकियाँ'
लेता उलझी 'तानें'।।
मेरे अन्तर्मन! अनहद मीत!
'नाद'-मय-समय न जाए बीत।।
सुनो प्रिय! सावन का संगीत।
मधुर-मन-भावन वाला गीत।।
मधुर-मन-भावन वाला गीत।।
पहले रिमझिम पड़ीं फुहारें,
फिर बरसा अमृत-सा पानी।
सावन-रूप- झमाझम देखा,
धरती ने की मनमानी ।।
प्राण!सच्ची है इनकी प्रीत।
हरित छवि,दिव्य रूप,भव-मीत।।
फिर बरसा अमृत-सा पानी।
सावन-रूप- झमाझम देखा,
धरती ने की मनमानी ।।
प्राण!सच्ची है इनकी प्रीत।
हरित छवि,दिव्य रूप,भव-मीत।।
सुनो प्रिय! सावन का संगीत।
मधुर-मन-भावन वाला गीत।।
मधुर-मन-भावन वाला गीत।।
सूख गए थे सभी स्रोत-जल,
विपदाएँ भी बरसी थीं।
धूप,तपन,लू,गर्मी से,
सारी धरती झुलसी थी।
सजन!दुख-सुख जगती की रीत,
अन्ततः सावन की ही जीत।।
विपदाएँ भी बरसी थीं।
धूप,तपन,लू,गर्मी से,
सारी धरती झुलसी थी।
सजन!दुख-सुख जगती की रीत,
अन्ततः सावन की ही जीत।।
सुनो प्रिय! सावन का संगीत।
मधुर-मन-भावन वाला गीत।।
मधुर-मन-भावन वाला गीत।।
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डाॅ0 (श्रीमती)गीता मिश्रा
25.6.2019
25.6.2019
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