दोहे प्रयास-
परहित पर-उपकार से,जन्म सफल हो जाय।
ध्यान लगा जो ईश में,भव-सागर तर जाय।।
श्रेष्ठ कर्म,श्रम जो करें,प्रभु पर कर विश्वास।
बदल जाएँ दुर्भाग्य सब,यदि हो सत्य प्रयास।।
- डाॅ0श्रीमती गीता मिश्रा 'गीत'
सुहानी-सुबह कविता 1. रँग में अपने रंग दिया, रवि ने सुबह से ही गगन। देख नभ की अरुणिमा को, चारों दिशाएँ भी मगन।। 2.लालिमा भी प्य...
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