मनहर घनाक्षरी ----
8,8,8,7 वर्ण पर यति,अंत में लघु,गुरु।
बादल उमड़ रहे बिजली कड़क रही
डरकर कोई नहीं बाहर निकलता,
देख खग,मृग,जन,जीव सब थम गए
छिप गए कोई नहीं डगर पे चलता
मचल-मचल मन-भँवर हवा में उड़े
पगला स्वयं को ही बार-बार छलता।
झूमती पवन देख तन में लहर उठे
कोई नहीं पास देख बस हाथ मलता
डाॅ0 श्रीमती गीता मिश्रा 'गीत'
प्रथम-प्रयास,मनहर घनाक्षरी के लिए (समीक्षा-हेतु )
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