Wednesday, 2 December 2020

मनहर घनाक्षरी--

 मनहर घनाक्षरी ----

8,8,8,7 वर्ण पर यति,अंत में लघु,गुरु।


बादल उमड़ रहे बिजली कड़क रही 

डरकर कोई नहीं बाहर निकलता,

देख खग,मृग,जन,जीव सब थम गए 

छिप गए कोई नहीं डगर पे चलता

मचल-मचल मन-भँवर हवा में उड़े

पगला स्वयं को ही बार-बार छलता।

झूमती पवन देख तन में लहर उठे

कोई नहीं पास देख बस हाथ मलता


डाॅ0 श्रीमती गीता मिश्रा 'गीत'

प्रथम-प्रयास,मनहर घनाक्षरी के लिए (समीक्षा-हेतु ) 

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