सम्माननीय साथियो!
सादर अभिवादन।
मुझे प्रसिद्ध कवि डाॅ0राकेश शर्मा 'राकेश' जी द्वारा काव्य मैराथन #PeetMeNotLeave में भाग लेने हेतु नामित किया गया है। मैं सात दिनों तक अपनी एक रचना पोस्ट करती रहूँगी। इस मैराथन में कविताओं का अनुवाद किया जाएगा और एक रूसी अल्मानक में प्रकाशित किया जाएगा।प्रतिदिन मैं अपने एक मित्र को ऐसा करने के लिए नामित करूँगी। आज प्रथम दिन केन्द्रीय विद्यालय की पूर्व हिन्दी शिक्षिका कवयित्री श्रीमती सुशीला धस्माना 'मुस्कान' जी से अनुरोध करती हूँ कि आज से सात दिनों तक इस पटल पर एक रचना पोस्ट करेंगी व प्रतिदिन एक कवि को नामित करने का कष्ट करेंगी।
डाॅ0श्रीमती गीता मिश्रा 'गीत'
हल्द्वानी,नैनीताल (उत्तराखण्ड)
इस पटल पर प्रथम दिन की मेरी रचना---
राष्ट्रीय ध्वज
राष्ट्रीय ध्वज की इच्छा है कि चाहे विषम से विषम परिस्थितियाँ क्यों न आ जाएँ? पर उसे तो लहराना ही पड़ेगा।वो फहर-फहर कर पुनर्निर्माण के लिए प्रेरित करता ही रहेगा।ध्वज राष्ट्र की अखंडता,एकता,स्वतंत्रता व सीमा की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। सुप्त-हृदय जाग्रत करने के लिए, देश-भक्ति-भाव भरने के लिए तिरंगे को फहरना ही होगा।
उपर्युक्त भावों को दर्शाती काव्य-पंक्तियाँ-------
राष्ट्रीय ध्वज
मैं भारत का राष्ट्रीय ध्वज हूँ,
मुझको लहराना ही होगा।
विपदाएँ कैसी भी आएँ,
मुझको फहराना ही होगा।।
आशा की नव-किरण बनूँगा,
नूतन परिवर्तन होगा।
जोश,उमंग की तरंग बनूँगा,
जीने का साहस होगा।।
बंजर,सूखी धरती को भी,
हरित-क्रांति,हरियाली दूँगा।
आजादी पर मर-मिटने की-
चाहत मुक्त-उड़ान की दूँगा।।
जन-मन को सम्बल दूँगा मैं,
आत्म-शक्ति,ऊर्जा दूँगा।
फहर-फहर कर नील-गगन में,
नभ-सा विस्तृत मंडप दूँगा।।
माना,कुदरत क़हर ढा रही,
भूमंडल में महामारी है।
बाढ़ कहीं,भूकम्प कहीं तो,
भुखमरीऔर लाचारी है।।
परिणाम सुखद जब होते थे,
तब ऊँचा मुझे उठाते थे।
विपरीत परिस्थिति आई तो,
क्यों पृथक नीति अपनाते हो?
अपनी छाया-तले,देश-हित,
विविध-योजना शुरू करूँगा।
शपथ-पत्र का साक्ष्य बनूँगा,
संगठन-शक्ति को बल दूँगा।।
उठो!सजाओ माँ को फिर से,
सोया पुरुषार्थ, जगा दूँगा।
निर्माण करो फिर-फिर भारत का,
जय-जयकार मचा दूँगा।।
संविधान की-'गौरव-गाथा',
झूम-झूमकर गाऊँगा।
सबसे पहले-'देश-अस्मिता',
ऐसी बिगुल बजाऊँगा।।
बलिदान दिया जिन वीरों ने,
मैं उनकी महिमा गाऊँगा।
मान बढ़ाया,आहुति देकर,
'अमर-ज्योति' जलवाऊँगा।।
मैं 'अमर-ज्योति' जलवाऊँगा।
डाॅ0श्रीमती गीता मिश्रा 'गीत'
हल्द्वानी,नैनीताल (उत्तराखण्ड)
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