माँ तो माँ होती है
नमन करूँ मैं प्रथम गुरू को
माँ तो माँ होती है।
उदर-कष्ट सह जन्म दिया,
वो बेशकीमती मोती है।
दायित्वों का बोझ लिए विपदा,पीड़ाएँ ढोती है।
तब भी काम-काज करती
जब सारी दुनिया सोती है।
ममता का संसार लिए
वो बीज,प्यार के बोती है।
अपना सर्वस्व लुटा देती
निज सुख-सपनों को खोती है।
समदरशी वाली आँखों में
पारदर्शिता होती है।
विषम परिस्थिति जब भीआती,
माँ की गोदी होती है।
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डाॅ0श्रीमती गीता मिश्रा 'गीत'
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