Wednesday, 2 December 2020

माँ तो माँ होती है

          माँ तो माँ होती है 


नमन करूँ मैं प्रथम गुरू को

 माँ तो माँ होती है। 

उदर-कष्ट सह जन्म दिया, 

 वो बेशकीमती मोती है।

दायित्वों का बोझ लिए विपदा,पीड़ाएँ ढोती है।

तब भी  काम-काज करती 

जब सारी दुनिया सोती है।

ममता का संसार लिए 

वो बीज,प्यार के बोती है।

अपना सर्वस्व लुटा देती

निज सुख-सपनों को खोती है।

समदरशी वाली आँखों में

पारदर्शिता होती है।

विषम परिस्थिति जब भीआती,

माँ की गोदी होती है। 

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डाॅ0श्रीमती गीता मिश्रा 'गीत'

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