14,12=26 मात्राएँ,अन्त-लघु,गुरु
गीतिका छंद
सदगुरु-चरण-रज पुण्य से,पाते सभी
जानिए।
लो ज्ञान जितना ले सको,दिव्यता से लीजिए।।
अभिमान तज कर देखिए, मन समर्पित कीजिए।
भ्रम सभी मिट जाएँगे,ज्योतित शिखा को कीजिए।।
परमात्मा से आत्मा का,मिलन जब हो जाएगा।
ब्रह्म का वैभव अलौकिक, रूप अनुपम छाएगा।।
सम्पूर्ण वसुधा के लिए,समदृष्टि कर लीजिए।
घर,सदन,परिवार जैसा,इस धरा को कीजिए।।
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(गुरुवार को गुरु पर अभी-अभी लिखी रचना)
डाॅ0 श्रीमती गीता मिश्रा 'गीत'
हल्द्वानी, नैनीताल (उत्तराखण्ड)
8171881903
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