Wednesday, 2 December 2020

हास्य-व्यंग्य दोहे----

 हास्य-व्यंग्य---दोहेहास्य-व्यंग्य---दोहे


कवि,लेखक जितने मिले,सबका बुरा है हाल।

आँखों में चश्मा चढ़ा,पिचक रहे हैं गाल।।

साथियो!----

अर्द्धरात्रि तक जगे रहें,लिखने से मजबूर।

तन का ध्यान रखें नहीं, रोग लगे भरपूर।।

साथियो!----

दाँतों में कीड़ा लगा,आँतों में सब रोग।

फिर भी क़लम चला रहे,छोड़ दिए सब भोग।।

साथियो!----

केवल भावों में जिएँ,नहीं चाहिए माल।

सोचें, कैसे पड़ जाए,कण्ठ विजय की माल।।

साथियो!---

परहित ही जीते रहे,गाते रहते छंद।

जनहित ही रचना रचें,धन्य-धन्य कवि-वृन्द।।

साथियो!


----------×××××----------

डाॅ0श्रीमती गीता मिश्रा 'गीत'

हल्द्वानी, नैनीताल (उत्तराखण्ड)



कवि,लेखक जितने मिले,सबका बुरा है हाल।

आँखों में चश्मा चढ़ा,पिचक रहे हैं गाल।।

साथियो!----

अर्द्धरात्रि तक जगे रहें,लिखने से मजबूर।

तन का ध्यान रखें नहीं, रोग लगे भरपूर।।

साथियो!----

दाँतों में कीड़ा लगा,आँतों में सब रोग।

फिर भी क़लम चला रहे,छोड़ दिए सब भोग।।

साथियो!----

केवल भावों में जिएँ,नहीं चाहिए माल।

सोचें, कैसे पड़ जाए,कण्ठ विजय की माल।।

साथियो!---

परहित ही जीते रहे,गाते रहते छंद।

जनहित ही रचना रचें,धन्य-धन्य कवि-वृन्द।।

साथियो!


----------×××××----------

डाॅ0श्रीमती गीता मिश्रा 'गीत'

हल्द्वानी, नैनीताल (उत्तराखण्ड)


No comments:

Post a Comment

  सुहानी-सुबह             कविता 1. रँग में अपने रंग दिया, रवि ने सुबह से ही गगन। देख नभ की अरुणिमा को, चारों दिशाएँ भी मगन।। 2.लालिमा भी प्य...