अति चतुराई छोड़ दो,भोलापन अनमोल।
सीधे-सच्चे प्रेम को, कटुता से मत तोल।।
सुहानी-सुबह कविता 1. रँग में अपने रंग दिया, रवि ने सुबह से ही गगन। देख नभ की अरुणिमा को, चारों दिशाएँ भी मगन।। 2.लालिमा भी प्य...
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