शरद-पूर्णिमा-
पूर्णेन्दु गगने शोभितम्,शीतल मधुरतम् दिव्यतम्।
उज्ज्वल दिगन्त सुधवलतम,
उत्तुङ्गजल मनमोहितम।
डाॅ0श्रीमती गीता मिश्रा 'गीत'
सुहानी-सुबह कविता 1. रँग में अपने रंग दिया, रवि ने सुबह से ही गगन। देख नभ की अरुणिमा को, चारों दिशाएँ भी मगन।। 2.लालिमा भी प्य...
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