Saturday, 24 February 2024

 शरद-पूर्णिमा-


पूर्णेन्दु गगने शोभितम्,शीतल मधुरतम् दिव्यतम्।  

उज्ज्वल दिगन्त सुधवलतम,

उत्तुङ्गजल मनमोहितम।



डाॅ0श्रीमती गीता मिश्रा 'गीत' 


No comments:

Post a Comment

  सुहानी-सुबह             कविता 1. रँग में अपने रंग दिया, रवि ने सुबह से ही गगन। देख नभ की अरुणिमा को, चारों दिशाएँ भी मगन।। 2.लालिमा भी प्य...