दोहे - विषय - हिन्दी
1.हिन्दी में सब ज्ञान है,हिन्दी अपना मान।
समझ हुई जब से मुझे,गाये हिन्दी गान।
2.सरल शुद्ध रस-खान है,लिपि वैज्ञानिक मीत।
अन्तर्मन की चाह है,रहे सदा ही प्रीत ॥
3.संस्कृत से निकली हुई,तत्सम् तद्भव साथ।
अलंकार रस छंद हैं,विविध विधाएँ हाथ॥
4.रवि समान हिन्दी लगे,ले आती है भोर।
अपनाओ जितना इसे,फैलेगी चहुँ ओर ।।
5.भारत की पहचान है,हम सबका सम्मान।
भारतमाता मानती,हिन्दी है अभिमान।।
6.एक राष्ट्रभाषा बने,दृढ़ हो भारत देश।
अपने में सम्पूर्ण है,हिन्दी का परिवेश।।
7.एक देश में एक ही,भाषा जग की रीति।
भारत ही पीछे रहा,लागू हो अब नीति।।
8.जीवन की हर दौड़ में,हिन्दी देती साथ।
सच्चाई के सामने,झुक जाता है माथ ॥
9.भाँति-भाँति की बोलियाँ, उपभाषा के चित्र।
आंचलिकशब्दावलियाँ,अपनाती बन मित्र।।
10.हिन्दी को भी विश्व में,शीघ्र मिले सम्मान,
अंग्रेजी लिख बोलकर,क्यों करते अपमान।।
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डॉ० श्रीमती गीता मिश्रा 'गीत'
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