Saturday, 24 February 2024

 मनहरण घनाक्षरी


गंगाजल संग घोली,गंधित चन्दन रोली,

अक्षत सुमन धूप,दीपक जलाऊँगी।

ओढ़ पट पीत रंग,भाल कुमकुम संग,

तुलसीदल श्रीफल,प्रेम से खिलाऊँगी।

राम नाम बोल-बोल,आनन्द में डोल-डोल,

चरणामृत घोल-घोल,भक्तों को पिलाऊँगी,

जप तप नाम ध्यान,सिद्धि योग आत्मज्ञान,

व्रत उपवास रख,राम से मिलाउँगी।।


- डॉ० गीता मिश्रा 'गीत'



No comments:

Post a Comment

  सुहानी-सुबह             कविता 1. रँग में अपने रंग दिया, रवि ने सुबह से ही गगन। देख नभ की अरुणिमा को, चारों दिशाएँ भी मगन।। 2.लालिमा भी प्य...