मनहरण घनाक्षरी
गंगाजल संग घोली,गंधित चन्दन रोली,
अक्षत सुमन धूप,दीपक जलाऊँगी।
ओढ़ पट पीत रंग,भाल कुमकुम संग,
तुलसीदल श्रीफल,प्रेम से खिलाऊँगी।
राम नाम बोल-बोल,आनन्द में डोल-डोल,
चरणामृत घोल-घोल,भक्तों को पिलाऊँगी,
जप तप नाम ध्यान,सिद्धि योग आत्मज्ञान,
व्रत उपवास रख,राम से मिलाउँगी।।
- डॉ० गीता मिश्रा 'गीत'
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