Saturday, 24 February 2024

 गीत - धर्म-दीपक


स्थायी -

धर्म दीपक जल उठें, जन-मन जगाने के लिए।

अन्तरा -

1.दीन दुखियों का सहारा बन सकें प्रभु शक्ति दो,

गीत गा भजते रहें दिन-रात ऐसी भक्ति दो।

राम धुन सुन,राम-पथ चुन,तम भ्रम भगाने के लिए।।

धर्म दीपक जल उठें,जन-मन जगाने के लिए।

2.प्रेम करुणा भाईचारा का सुखद व्यवहार हो,

राग रंजिश द्वेष कटुता भाव का संहार हो,

शुद्ध निश्छल घट रहे,प्रभु में लगाने के लिए।

धर्म दीपक जल उठें,जन-मन जगाने के लिए।।

3.विश्व के कल्याण की फलती रहे सद्भावना,

नष्ट कर दो जड़ सहित उर में पली दुर्भावना, 

मूल बन कर दो सहारा फल उगाने के लिए।।

धर्म दीपक जल उठें,जन-मन जगाने के लिए।


-डॉ० गीता मिश्रा 'गीत'



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