रघुवर चले अवध की ओर।
मंगल कलश सजे घर द्वारे,
करतल शंख बजे,उर गा रे।
ऋद्धि सिद्धि शुभ लाभ सगुन लखि,
गद्गद झुके नयन कर जोर।।
सरयू सलिल अनिल आनन्दित,
उमड़ी घटा जलाभिषेक हित।
नभ से सुमन गिराएँ हरि हर,
छाई सखी सुहानी भोर।।
सकल भुवन श्रीराम समर्पित,
जन-मन गुण गौरव सुन दर्पित।
शहनाई दुँदुभी नगाड़े,
करते प्रतिपल भाव विभोर।।
रघुवर चले अवध की ओर।
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डॉ० गीता मिश्रा 'गीत'
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