Saturday, 24 February 2024

 दीप+अवलि =दीपावलि

             [गीत ]

स्थाई -

दीप अवलि दमके।

हर घर आँगन,मन्दिर प्रांगन

जगमग पथ चमके।।

अन्तरा -

1.विपुल धरोहर,भू पर नभ पर,

झिलमिल हिलमिल रहें परस्पर। मनहर शुभ घड़ियाँ छाई हैं,

पवन चले थमके।

दीप अवलि दमके।


2.अन्तर्मन हिय पिय मोहित हैं

दीप-रश्मियाँ सह ज्योतित हैं।

छलक रहे घट प्रेम स्नेह से,

चीरे पट तमके।

दीप अवलि दमके ।।


3.धरती का रच गया स्वयंवर,

मुदित क्षितिज रत्नाकर अम्बर।

सरवर झरने तरनि-तरंगें,

मंगल स्वर छमके।

दीप अवलि दमके।।


4.देव सुरेश महेश प्रफुल्लित

कलिकाएँ मधुवन की मुकुलित।

रमा उमा ब्रह्माणी करतीं,

सुमन वृष्टि जमके।

दीप अवलि दमके।।

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डॉ० श्रीमती गीता मिश्रा 'गीत'


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