दीप+अवलि =दीपावलि
[गीत ]
स्थाई -
दीप अवलि दमके।
हर घर आँगन,मन्दिर प्रांगन
जगमग पथ चमके।।
अन्तरा -
1.विपुल धरोहर,भू पर नभ पर,
झिलमिल हिलमिल रहें परस्पर। मनहर शुभ घड़ियाँ छाई हैं,
पवन चले थमके।
दीप अवलि दमके।
2.अन्तर्मन हिय पिय मोहित हैं
दीप-रश्मियाँ सह ज्योतित हैं।
छलक रहे घट प्रेम स्नेह से,
चीरे पट तमके।
दीप अवलि दमके ।।
3.धरती का रच गया स्वयंवर,
मुदित क्षितिज रत्नाकर अम्बर।
सरवर झरने तरनि-तरंगें,
मंगल स्वर छमके।
दीप अवलि दमके।।
4.देव सुरेश महेश प्रफुल्लित
कलिकाएँ मधुवन की मुकुलित।
रमा उमा ब्रह्माणी करतीं,
सुमन वृष्टि जमके।
दीप अवलि दमके।।
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डॉ० श्रीमती गीता मिश्रा 'गीत'
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