गीतिका
शारदे! मैं गा सकूँ तुम कण्ठ दो संगीत का।
छेड़ दो वीणा सुरों में राग गाऊँ प्रीत का।
तान लूँ,आलाप लूँ मैं या सुनाऊँ गीतिका।
पार नैया को लगा दो ज्ञान दे दो नीति का।
आरती करती रहूँ नित माँ मुझे वरदान दो।
गीत नूतन ही रचूँ,मेधा प्रखर धी दान दो।
साधना पूरी करूँ मैं शारदे संगीत दो।
भावना मेरी सुनो माँ !'गीत'को भी गीत दो।।
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डाॅ0 श्रीमती गीता मिश्रा 'गीत'
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