मनहरण घनाक्षरी छंद
[ शरद् पूर्णिमा ]
स्वर्णिम किरन सह,हँस रहा पूर्णचंद,
दमक रहे सितारे,रजनी धवल है।
हिलमिल-झिलमिल,लगे प्रभु के खिलौने।
नयनाभिराम सब,बिंबक नवल है।।
शीतल मदिर हवा,वन-उपवन फिरे,
रुपहली चाँदनी की,कान्ति भी उज्ज्वल है,
उमंग-तरंग लिये,यामिनी उल्लास भरे,
रीते-रीते मन में भी,खिलता कँवल है।।
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डॉ०श्रीमती गीता मिश्रा 'गीत'
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