Saturday, 24 February 2024

 विषय---दीपक


1.मैं माटी का छोटा दीपक,

 पथआलोकित करता हूँ।

 जलता रहता,दुःख सहता पर,

 जग-मग ज्योतित करता हूँ।।


2.करूँ समर्पण तन-मन अपना,

 परहित धर्म निभाता हूँ।

 छोड़ स्वार्थ, परमार्थ ही जीता,

 जनहित नीति सिखाता हूँ ।।


3.मैं,बना उजाला तम-पथ का,

  नि:स्वार्थ स्वयं जल जाता हूँ।

 जो भी नेह से भरता रहता,

  उसका साथ निभाता हूँ।।


5.जीवन भले ही छोटा मेरा

   लेकिन राह दिखाता हूँ।

  अन्त समय तक जल-जलकर

  मैं,अपना धर्म निभाता हूँ।।


4.आशा सदा बनाए रखना

हर पल ध्यान रखो मन में।

जीवन-ज्योति जलाए रखना, 

जब तक प्राण रहे तन में।।


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डाॅ0 श्रीमती गीता मिश्रा 'गीत' 


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