विषय---दीपक
1.मैं माटी का छोटा दीपक,
पथआलोकित करता हूँ।
जलता रहता,दुःख सहता पर,
जग-मग ज्योतित करता हूँ।।
2.करूँ समर्पण तन-मन अपना,
परहित धर्म निभाता हूँ।
छोड़ स्वार्थ, परमार्थ ही जीता,
जनहित नीति सिखाता हूँ ।।
3.मैं,बना उजाला तम-पथ का,
नि:स्वार्थ स्वयं जल जाता हूँ।
जो भी नेह से भरता रहता,
उसका साथ निभाता हूँ।।
5.जीवन भले ही छोटा मेरा
लेकिन राह दिखाता हूँ।
अन्त समय तक जल-जलकर
मैं,अपना धर्म निभाता हूँ।।
4.आशा सदा बनाए रखना
हर पल ध्यान रखो मन में।
जीवन-ज्योति जलाए रखना,
जब तक प्राण रहे तन में।।
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डाॅ0 श्रीमती गीता मिश्रा 'गीत'
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