हरिगीतिका----मुक्तक
मात्रा भार--- 16,12
चरणान्त---1, 2
अब साल नूतन आ रहा है,
मन मुदित हर दिन रहें।
पावन सभी की भावना हो,
नीतियाँ पल छिन रहें।
जीवन सफल सार्थक रहें सब, धर्म धाराएँ बहें।
दीप घर-घर दर जलें,अब नहीं सुख बिन रहें।।
------×××-----
डाॅ0श्रीमती गीता मिश्रा 'गीत'
No comments:
Post a Comment