Saturday, 24 February 2024

हरिगीतिका----मुक्तक  


 

मात्रा भार---       16,12

चरणान्त---1, 2


अब साल नूतन आ रहा है, 

मन मुदित हर दिन रहें।

पावन सभी की भावना हो,

नीतियाँ पल छिन रहें।

जीवन सफल सार्थक रहें सब,  धर्म धाराएँ बहें।

दीप घर-घर दर जलें,अब  नहीं सुख बिन रहें।।


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डाॅ0श्रीमती गीता मिश्रा 'गीत'


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