गीत -आंग्ल नववर्ष
आंग्ल नववर्ष का स्वागत, जनवरी माह अभिनन्दन,
सकल शुभफल दे अभ्यागत, भजे मन राम रघुनन्दन।
1.सुरभि शीतलता देती हो, सुमन खिलके महकते हों,
सलिल सबको मिले निर्मल,
मेघ बरसा के कहते हों।।
हरित हों बाग वन उपवन,
रहे मन प्रमुदित मानव का।
भले ही शत्रु अहि लिपटें,
बिखेरें गन्ध बन चन्दन।।
सकल शुभफल दे अभ्यागत, भजे मन राम रघुनन्दन।
2.जगत् में शान्ति हो सुख हो, भक्ति गीतों से हो रंजन,
रुदन स्वर कष्ट विपदा के, समापन कर दो दुःख भंजन।
प्रकृति के मुग्ध मनहर स्चर,
सुनें जन-जन सहज मन से।
पवन पल्लव विहग कलरव,
सरल बचपन रुदन क्रन्दन।।
सकल शुभफल दे अभ्यागत, भजे मन राम रघुनन्दन।
3.अखिल संसार घर-सा हो,
रहे जीवन भी मर्यादित,
निखिल अपनत्व ममता हो,
प्रेम गुण मन में आच्छादित,
मिटें सब भेद झगड़ों के,
परस्पर मैत्री सच्ची हो,
दया करुणा सदा उमड़े,
दिलों में धड़कन स्पन्दन।।
नवल सम्वत् का सुस्वागत,करें नववर्ष अभिनन्दन।
सकल शुभफल दे अभ्यागत, भजे मन राम रघुनन्दन।
---------------
डॉ० श्रीमती गीता मिश्रा 'गीत'
No comments:
Post a Comment