मुक्तक - ईश्वर से कामना है
दीपक जलें सभी घर,
तम से उबार देना,
पीड़ा न हो किसी उर,खुशियाँ अपार देना।
जीवन सुगम नहीं है,आगम- निगम हमारे !
डगमग भटक रहे हैं,भव से ही तार देना।।
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डॉ० श्रीमती गीता मिश्रा 'गीत'
सुहानी-सुबह कविता 1. रँग में अपने रंग दिया, रवि ने सुबह से ही गगन। देख नभ की अरुणिमा को, चारों दिशाएँ भी मगन।। 2.लालिमा भी प्य...
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