Saturday, 24 February 2024

 बचपन कविता-


सावन की रिमझिम बूँदों-सा प्यारा बचपन बना रहे।

गोमुख निःसृत गंगाजल-सा पावन बचपन बना रहे।।


बच्चों की किलकारी को सुनने वाले मन,प्राण मिलें।

सहमे,सिकुड़े,भूखे,प्यासे हर बचपन को ही त्राण मिले।।


रंग-बिरंगे खेल-खिलौने घर-आँगन में बिखर पड़ें।

धूम-मचाते,खुशी लुटाते सबके बच्चे निखर पड़ें।।


बचपन बीते मधुर गीत-सा,जीवन भर जो याद रहे।

सुन्दर रंगों में पुष्पित हो,उपवन-सा आबाद रहे।।


बाल-गीत कवि-वृन्द लिखें,लेखनी सदा आह्लादित हो।

संगीत 'गीत'भर देगी उसमें,झूम-झूम आनन्दित हो।।


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डाॅ0श्रीमती गीता मिश्रा 'गीत'

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