बचपन कविता-
सावन की रिमझिम बूँदों-सा प्यारा बचपन बना रहे।
गोमुख निःसृत गंगाजल-सा पावन बचपन बना रहे।।
बच्चों की किलकारी को सुनने वाले मन,प्राण मिलें।
सहमे,सिकुड़े,भूखे,प्यासे हर बचपन को ही त्राण मिले।।
रंग-बिरंगे खेल-खिलौने घर-आँगन में बिखर पड़ें।
धूम-मचाते,खुशी लुटाते सबके बच्चे निखर पड़ें।।
बचपन बीते मधुर गीत-सा,जीवन भर जो याद रहे।
सुन्दर रंगों में पुष्पित हो,उपवन-सा आबाद रहे।।
बाल-गीत कवि-वृन्द लिखें,लेखनी सदा आह्लादित हो।
संगीत 'गीत'भर देगी उसमें,झूम-झूम आनन्दित हो।।
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डाॅ0श्रीमती गीता मिश्रा 'गीत'
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