Saturday, 24 February 2024

 माँ तो बस माँ होती है 


नमन करूँ मैं प्रथम गुरू को माँ तो बस माँ होती है। 

उदर-कष्ट सह जन्म दिया,वो बेशकीमती मोती है।

दायित्वों का बोझ लिए विपदा, पीड़ाएँ ढोती है।

तब भी काम-काज करती जब सारी दुनिया सोती है।


ममता का संसार लिए वो बीज,प्यार के बोती है।

निज सर्वस्व लुटा देती, सुख-सपने अपने खोती है।

समदरशी वालीआँखों में पारदर्शिता होती है।

विषम परिस्थिति जब भी आती,

माँ की गोदी होती है। 

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डाॅ0श्रीमती गीता मिश्रा 'गीत'


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