नमन भावों के मोती 🙂👏🏼
विषय-प्रकाश
1.आदि देव पर ही टिकी,जीव-जगत की आश।
बिन उसके ब्रह्माण्ड में, होता नहीं प्रकाश।।
2.अन्तर्मन ज्योतित रहे,सब ज्योतित हो जाए।
लौ उमंग की जब बढ़े,प्रभु-प्रकाश मिल जाए।।
स्वरचित
डाॅ0श्रीमती गीता मिश्रा 'गीत'
सुहानी-सुबह कविता 1. रँग में अपने रंग दिया, रवि ने सुबह से ही गगन। देख नभ की अरुणिमा को, चारों दिशाएँ भी मगन।। 2.लालिमा भी प्य...
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